Friday, 8 September 2017

जानिए कौन हैं गौरी लंकेश जिनकी मौत पर कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक मचा है बवाल...


गौरी लंकेश एक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता थी  उनका जन्म 19 जनवरी को कर्नाटक में लिंगायत समुदाय में हुआ था गौरी साप्ताहिक पत्रिका लंकेश पत्रिका की  संपादक थी उन्होंने कुछ समय तक टाइम्स ऑफ इंडिया और संडे मैगजीन को भी अपनी सेवाएं दी थी 
गौरी लंकेश को हिंदुत्वादी एवं संघ की विचारधारा का कट्टर विरोधी माना जाता था पिछले दिनों अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले में उनके बयान की , " शिव से मिलने गए थे और शिव मे ही मिल गए " ने काफी विवाद पैदा किया था
गौरी लंकेश ने  कर्नाटक सरकार के मंत्री डी के शिवकुमार के भ्रष्टाचार पर कई खुलासे की उन्होंने भाजपा सांसद प्रहलाद जोशी के ऊपर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जिन्हें नही साबित कर पाने के कारण कोर्ट ने उन पर ₹5000 का जुर्माना लगाया था
गौरी लंकेश का निजी जीवन मैं बेहद खालीपन था उनके पूर्व पति चिदानंद राजघाट जो कि वाशिंगटन पोस्ट में संपादक के रूप में कार्यरत हैं से गौरी का तलाक हो चुका था जिसके बाद वह अकेली थी उन्होंने जिग्नेश मेवानी उमर खालिद और कन्हैया कुमार को अपने बेटे जैसा बताया था 5 सितंबर की रात अज्ञात हमलावरों की गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या कर दी जिसके बाद बेंगलुरु में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई कांग्रेस एवं वामपंथी संगठनो ने इसे भाजपा व संघ की साजिश बताया वहीं भाजपा ने इसके के लिए कर्नाटक सरकार की फेल कानून व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया 

Thursday, 13 July 2017

लालू - नीतीश के इस टकराव से कैसे होगा मोदी को दोहरा फायदा ?

बिहार और देश की सियासत इन दिनों लालू परिवार और नीतीश कुमार के इर्द गिर्द घूम रही है । दरअसल पिछले कुछ दिनों मे सुशील मोदी के गंभीर आरोप और CBI की जाँच मे फंसे लालू परिवार के पास एक ही सहारा बचा था और वो था विपक्षी पार्टियों के समर्थन का जिससे लालूजनता के बीच ये साबित करने की कोशिश करते की मोदी सरकार उनके ख़िलाफ़ बदले की भावना से ये करवाई कर रही है ।
लेकिन जनता मे अपनी छवि को लेकर बेहद सजग् रहने वाले नितीश कुमार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ज़ीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाते हुए तेजस्वी यादव के इस्तीफे की मांग कर डाली ।
इस सब घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति ऐसे मुकाम पे आकर खड़ी हो गयी है जहाँ से भाजपा के लिए चित और पट् दोनो ही मेरा वाली स्थिति बनती हुई नजर आ रही है
दरअसल नीतीश के सामने इस समय दो विकल्प हैं पहला तो ये कि वो महागठबन्धन तोड़कर बीजेपी के साथ आ जाएं
ऐसा होने की स्थिति मे 2019 मे बिहार मे मोदी की राह बेहद आसान हो जायेगी क्योंकि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लालू और नेतृत्वविहीन नजर आ रही काँग्रेस के लिए मोदी नीतीश की जोड़ी को हराना लगभग असम्भव हो जायेगा और तो और अगर नीतीश जाते हैं तो विपक्ष के पास कोई ऐसा विश्वसनीय चेहरा नही रहेगा जिसके नाम पर वो वोट मांग सके ।
दूसरी स्थिति मे नीतीश कुमार RJD के साथ सरकार चलाते रहें मगर अगर वो ऐसा करते हैं तो जनता को ये जवाब देना
मुश्किल हो जायेगा कि वो अपने निजी अहंकार और महत्वाकांक्षा के चलते एक भ्रष्टाचारी का साथ दे रहें हैं और ऐसे मे भी बिहार मे मोदी की राह आसान होती हुई दिख रही है